स्टे पर भी स्टाइल, धमकी ऑन द फ़ाइल : Ratlam
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स्टे पर भी स्टाइल, धमकी ऑन द फ़ाइल
रतलाम शहर की फिज़ा इन दिनों हाईकोर्ट स्टे और हाई वॉल्यूम धमकियों के बीच झूल रही है। मामला एक साधारण-सी बाउंड्री वॉल का है, जो असाधारण रूप से माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और जिस पर स्पष्ट स्टे ऑर्डर भी विद्यमान है।
लेकिन जनाब! जब जोश, सत्ता और माइक एक साथ आ जाएँ, तो स्टे भी कभी-कभी “स्टे-टस” में चला जाता है।
बताया जाता है कि एक माननीय नेता जी ने खुले आम जनता के बीच निगम आयुक्त को यह ऐतिहासिक घोषणा कर दी—
"एफ़आईआर दर्ज करो, तब ही आप जाओगे… घेर लो कमिश्नर को… नहीं तो रतलाम की फिज़ा बिगाड़ दूँगा।”
सूत्रों के अनुसार, इस दौरान कानून वहीं खड़ा-खड़ा सोचता रहा कि
“मैं लागू होऊँ या बाद में नोटशीट बनूँ?”
शहरवासी हैरान हैं कि जब मामला अदालत में है और दीवार पर न्यायालय की मुहर लगी हुई है, तो हथौड़ा आखिर किसके आदेश से गर्म हुआ?
क्या अब स्टे आदेश भी मौके पर उपस्थित होकर अपना परिचय पत्र दिखाए?
सबसे रोचक तथ्य यह है कि पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की चुप्पी इतनी गहरी रही कि वह स्वयं एक स्टे ऑर्डर जैसी प्रतीत हुई, ना तो तुरंत कानूनी कार्रवाई,
ना ही सार्वजनिक रूप से कानून-व्यवस्था पर कोई स्पष्ट बयान।
कानूनी जानकारों का कहना है कि
“यदि धमकी सार्वजनिक है, अधिकारी सार्वजनिक हैं और मामला न्यायालय में लंबित है, तो सवाल भी सार्वजनिक ही उठेंगे।”
अब जनता पूछ रही है—
क्या अदालत का स्टे ज़मीन पर लागू नहीं होता?
क्या धमकी अब प्रशासनिक प्रक्रिया का नया विकल्प बन चुकी है?
और क्या कानून केवल फ़ाइलों में सुरक्षित रखने की वस्तु रह गया है?
फिलहाल रतलाम की फिज़ा बिगड़ी नहीं है,
लेकिन कानून की साख ज़रूर असमंजस में खड़ी दिखाई दे रही है।
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